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हिमालय के पिघलने से भारत को भी क्यों डरना चाहिए? पाकिस्तान में बाढ़ देखें

पाकिस्तान में भारी बारिश और फिर बाढ़ के कारण स्थिति बहुत विकट हो गई है। अब तक 1100 से ज्यादा

हिमालय के पिघलने से भारत को भी क्यों डरना चाहिए? पाकिस्तान में बाढ़ देखें

Indianews@agencyBy : Indianews@agency

  |  2022-09-03T03:16:19+05:30

पाकिस्तान में भारी बारिश और फिर बाढ़ के कारण स्थिति बहुत विकट हो गई है। अब तक 1100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि क्या करेI दुनिया भर से मदद की अपील की जा चुकी है। बाढ़ कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया हैI बदलता मौसम बाढ़ के लिए जिम्मेदार है, साथ ही हिमालय में पिघलते ग्लेशियरों ने संकट को और बढ़ा दिया है। ग्लेशियरों का पिघलना भी भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), इंदौर के शोधकर्ताओं ने इस साल की शुरुआत में हीटवेव और हीटवेव के कारण हिमालय के ग्लेशियरों में अत्यधिक पिघलने को दर्ज किया है, इंडिया टुडे ने बताया। शोधकर्ता 15 वर्षों से अधिक समय से हिमालय के बर्फ के आवरण, बर्फ के निर्माण और मौसमी बर्फबारी पर नज़र रख रहे हैं।

तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर

IIT इंदौर के एक ग्लेशियोलॉजिस्ट मोहम्मद फारूक आजम ने ब्लूमबर्ग को बताया, “हमने जून में इसे (ग्लेशियर) ट्रैक करना शुरू किया और अगस्त तक हमें इसके अवशेष भी नहीं मिले। गर्मी की शुरुआत में गर्मी का अहसास तेजी से हुआ, मार्च और अप्रैल में ही तापमान ने 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नतीजतन, ग्लेशियर पिघल गए। हमारी टीम पिछले हफ्ते एक ग्लेशियर पर थी और हमने हिमालय में रिकॉर्ड तोड़ बर्फ पिघलते देखा है।

ग्लेशियरों के पिघलने से नदियां उफान पर

ग्लेशियरों के पिघलने के साथ ही अतिरिक्त बारिश के कारण पाकिस्तान की नदियां उफान पर आ गईं। ग्लेशियर के पिघलने के बाद हिमालय से निकलने वाले पानी ने नदियों के प्रवाह को और तेज कर दिया। इसे हिमनद झील प्रकोप बाढ़ कहा जाता है। हिमालय में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना कोई अकेली घटना नहीं है। इसी तरह की घटनाएं यूरोप के आल्प्स में भी देखी गई हैं। हिमालय के बारे में चिंता की बात यह है कि इसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बाहर जमे हुए मीठे पानी का सबसे बड़ा भंडार है।

पीने के पानी की कमी भी हो सकती है

IIT इंदौर द्वारा 2021 में किए गए एक पिछले अध्ययन से पता चला है कि इस क्षेत्र में ग्लेशियर और बर्फ का पिघलना महत्वपूर्ण घटक हैं और अगर यह एक सदी तक जारी रहा, तो एक दिन पानी की आपूर्ति पूरी तरह से कट जाएगी। दुनिया भर के ग्लेशियर क्षेत्रों में एक अरब से अधिक लोग बर्फ के पिघलने के बाद निकलने वाले पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में इनका तेजी से पिघलना भी भविष्य में पानी की कमी का कारण बन सकता है।

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