लॉन्ग कोविड(long Covid)के मरीजों के लिए वरदान बना Blood washing ट्रीटमेंट, जानिए कितना सेफI

लॉन्ग कोविड(long Covid)के मरीजों के लिए वरदान बना Blood washing ट्रीटमेंट, जानिए कितना सेफI

भले ही कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus pandemic) का प्रकोप थोड़ा कम हो गया हो लेकिन बीमारी की चपेट में आए बहुत लोग ठीक होने के बाद भी लंबे चलने वाले लक्षणों यानी लॉन्ग कोविड(long Covid) की चपेट में हैं। आज भी ऐसे लोगों में कई गंभीर लक्षण और बीमारी के साइड इफेक्ट्स नजर आ रहे हैं। हाल ही में, दुनियाभर की कई यूनिवर्सिटी और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) के शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 2020 से लगभग 14 करोड़ लोगों ने लंबे समय तक लॉन्ग कोविड के लक्षणों का अनुभव किया है, जिनमें से 4 करोड़ अकेले भारत में हैं।

लॉन्ग कोविड एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोरोना के मरीज ठीक होने यानी पॉजिटिव रिजल्ट आने के बाद भी कई हफ्तों, महीनों यहां तक कि सालों तक कोरोना के कुछ लक्षणों या दुष्प्रभावों का सामना कर सकते हैं। अध्ययन में बताए गए लॉन्ग कोविड लक्षणों (long covid symptoms) में श्वसन संबंधी परेशानी, पोस्ट एक्यूट थकान सिंड्रोम और दिमाग से जुड़े विकार थे। इसके अलावा, उन्होंने पाया कि विश्व स्तर पर, पुरुषों की तुलना में महिलाएं इन लक्षणों से पीड़ित हैं।

जाहिर है कोरोना का कोई इलाज नहीं है और जो व्यक्ति इसकी चपेट में आ गया, उसे ठीक होने के बाद भी किसी न किसी तरह की शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बाद में महसूस होने वाले यह लक्षण जल्दी पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। समस्या यह है कि इनका इलाज लंबा चलता है। इन दिनों लॉन्ग कोविड के लक्षणों के इलाज के लिए ‘ब्लड वॉशिंग’ (Blood washing) इलाज ट्रेंड में है। चलिए जानते हैं यह क्या है-

लॉन्ग कोविड के लक्षणों के लिए ब्लड वॉशिंग

ब्रिटिश आउटलेट आईटीवी न्यूज और द बीएमजे की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्विट्जरलैंड, जर्मनी और साइप्रस सहित विभिन्न देशों के लॉन्ग कोविड से पीड़ित हजारों लोग प्राइवेट क्लीनिक में वॉशिंग या फिल्टरिंग का सहारा ले रहे हैं, मेडिकल में इस टेक्निक को एफेरेसिस (Apheresis) कहा जाता है। कमाल की बात यह है कि यह लॉन्ग कोविड के लक्षणों के इलाज के लिए मान्य नहीं है।

ब्लड वॉशिंग क्या है?

ब्लड वॉशिंग या एफेरेसिस एक मेडिकल टेक्निक है, जिसका उपयोग आमतौर पर लिपिड विकारों के लिए किया जाता है और इसे सिकल सेल रोग जैसी कुछ स्थितियों के लिए प्रभावी कहा जाता है, जहां असामान्य लाल रक्त कोशिकाओं को समाप्त किया जा सकता है।

ब्लड वॉशिंग में क्या होता है?

इस उपचार में बड़ी सुइयां शामिल होती हैं, जिन्हें प्रत्येक हाथ में डाला जाता है और रक्त को एक फिल्टर के ऊपर से गुजारा जाता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं को प्लाज्मा से अलग किया जाता है। फिर, प्लाज्मा को फिर से लाल रक्त कोशिकाओं के साथ लाया गया और एक अलग नस के माध्यम से शरीर में फिर से भर दिया गया।

क्या ब्लड वॉशिंग लॉन्ग कोविड में प्रभावी है?

एफेरेसिस में रोगियों को थक्का-रोधी देना भी शामिल है। ऐसा माना जाता है कि लॉन्ग कोविड के लक्षण रक्त में छोटे थक्कों के कारण होते हैं, जो केशिकाओं के माध्यम से ऑक्सीजन के प्रवाह को अवरुद्ध कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि एफेरेसिस रक्त में परिसंचारी कारकों को छानने के लिए किया जाता है, जो सूजन और थक्के में शामिल होते हैं।

क्या ब्लड वॉशिंग सुरक्षित है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाज महंगा है। हालांकि हजारों लोग इसे अपनाने के लिए तैयार हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस इलाज की प्रभावशीलता का कोई सबूत सीमित नहीं है। लोग संभावित रूप से इन उपचारों तक पहुंचने के लिए दिवालिया हो सकते हैं। यह इलाज पूरी तरह से डॉक्टर की सलाह और जरूरत होने पर ही कराना चाहिए।

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