India News Agency
Begin typing your search above and press return to search.

2024 में नरेंद्र मोदी को हराने के लिए सिर्फ चेहरा ही काफी नहीं, जमीन पर भी काम करना होगाI

जद (यू) के एनडीए से अलग होने के बाद, चर्चा ने गति पकड़ ली है कि विपक्ष को 2024 के

2024 में नरेंद्र मोदी को हराने के लिए सिर्फ चेहरा ही काफी नहीं, जमीन पर भी काम करना होगाI

Indianews@agencyBy : Indianews@agency

  |  2022-09-03T03:07:51+05:30

जद (यू) के एनडीए से अलग होने के बाद, चर्चा ने गति पकड़ ली है कि विपक्ष को 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एक चेहरा मिल गया है। इसके बाद नए सिरे से विपक्षी एकता की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद भी कह चुके हैं कि अगली बार तीसरा मोर्चा नहीं बल्कि मुख्य मोर्चा बनेगा. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होगा? विपक्ष की एकता और विपक्ष के चेहरे की बात कहना और सुनना जितना आसान है, लेकिन रास्ता उतना ही कठिन।

राजनीतिक जानकारों की माने तो सिर्फ विपक्ष का चेहरा होना और विपक्ष का एकजुट होना ही एनडीए या मोदी को हराने के लिए काफी नहीं हैI बल्कि इसके लिए विपक्ष को जमीन पर काम करने की जरूरत है। विपक्षी दलों, खासकर क्षेत्रीय दलों को जो विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे विधानसभा चुनाव में जीत तो जाते हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन खराब क्यों होता हैI

राजनीतिक विशेषज्ञ अभय कुमार दुबे का कहना है कि लोकसभा चुनाव अभी दूर हैंI अभी विपक्षी दलों को वह काम करना चाहिए जो एक विपक्षी दल को दावा करने के बजाय करना है। यानी सरकार की खामियों को जनता तक ले जाएंI लेकिन वह सब करने के बजाय ऐसे दावे किए जा रहे हैं जिनका अभी कोई औचित्य नहीं है। मौजूदा राजनीतिक हालात में चेहरा ढूंढ़ने से चुनाव जीतना आसान नहीं होगाI

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और राजद से जुड़े सुबोध मेहता का कहना है कि जदयू-राजद के जुगलबंदी का असर निश्चित तौर पर देश की राजनीति पर पड़ेगाI लेकिन यह समझना होगा कि आम चुनाव दो उम्मीदवारों के बीच का चुनाव नहीं है। इसलिए इसकी तैयारी के लिए विपक्ष को अभी से अपनी रणनीति बनाकर काम करना होगा। उनका कहना है कि 2014 से पहले आम चुनाव में प्रधानमंत्री के चेहरे पर फोकस नहीं होता थाI

इसके अलावा विपक्षी एकता में और भी कई मूलभूत बाधाएं हैं। कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के पीछे कभी नहीं टिकेगी। स्थानीय राजनीति आदि के कारण कई क्षेत्रीय दल एक मंच पर नहीं आ सकते हैं। ये बुनियादी समस्याएं पहले से ही हैं और कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है।

Next Story