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2025 तक मिग-21 की वायुसेना से होगी विदाई, 'उड़ते ताबूत' ने 200 से ज्यादा पायलटों की जान लीI

भारतीय वायुसेना सितंबर में पुराने मिग-21 लड़ाकू विमान के बचे हुए चार स्क्वाड्रन में से एक को रिटायर करने जा

वायुसेना से मिग-21 की 2025 तक हो जाएगी विदाई, 200 से अधिक पायलटों की जान ले चुका है उड़ता ताबूत

Indianews@agencyBy : Indianews@agency

  |  2022-07-30T01:53:51+05:30

वायुसेना से मिग-21 की 2025 तक हो जाएगी विदाई, 200 से अधिक पायलटों की जान ले चुका है 'उड़ता ताबूत'

भारतीय वायुसेना सितंबर में पुराने मिग-21 लड़ाकू विमान के बचे हुए चार स्क्वाड्रन में से एक को रिटायर करने जा रही है. वहीं, शेष तीन स्क्वाड्रनों को अगले तीन वर्षों में 2025 तक चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृत्त किया जाएगा। इस मामले से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। गुरुवार को राजस्थान में एक मिग-21 टू सीटर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटना में फाइटर जेट के दोनों पायलटों की मौत हो गई थी।

अधिकारियों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, दो महीने में सेवानिवृत्त होने वाला स्क्वाड्रन श्रीनगर में स्थित 51 वीं स्क्वाड्रन है, जिसे स्वॉर्ड आर्म्स के रूप में भी जाना जाता है। यह वही स्क्वाड्रन है जिसमें अभिनंदन वर्थमान वर्ष 2019 में विंग कमांडर थे। अभिनंदन वर्थमान में, पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान F-16 को उसके पुराने मिग -21 विमान ने नियंत्रण रेखा के साथ एक कुत्ते की लड़ाई में मार गिराया था। अभिनंदन वर्धमान की वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

अभिनंदन ने एफ-16 को मार गिराया

अभिनंदन वर्थमान और F-16 के बीच डॉग फाइट भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर बमबारी के बाद हुई थी। जहां तक ​​मिग-21 की बात है तो इसका दुर्घटनाओं का लंबा इतिहास रहा है। इसे भारत में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विमानों में गिना जाता है। हाल के वर्षों में कई मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इसलिए इसे अब 'उड़ता हुआ ताबूत' भी कहा जाता है।

सोवियत संघ से मिले मिग-21

भारतीय वायु सेना को यह विमान सोवियत संघ यानी रूस से 1963 में मिला था। अधिकारियों ने बताया कि पिछले छह दशकों के दौरान 400 से अधिक मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, जिसमें लगभग 200 पायलटों की जान चली गई। हादसों की बात करें तो मिग-21 किसी भी अन्य फाइटर प्लेन से ज्यादा क्रैश हुआ है। हालांकि इसके पीछे एक वजह यह भी रही है कि यह विमान भी बाकियों से ज्यादा समय तक सेवा दे रहा है।

सेवानिवृत्ति में देरी क्यों?

पूर्व सहायक वायुसेनाध्यक्ष एयर वाइस मार्शल सुनील नैनोदकर (सेवानिवृत्त) ने पहले पूछा कि क्या कोई विकल्प था? अपने आसमान की सुरक्षा के लिए आपके पास निश्चित संख्या में लड़ाकू विमान होने चाहिए। बहु-भूमिका वाले लड़ाकू विमानों को शामिल करने में देरी हुई। 126 जेट की अपेक्षित आवश्यकता के बजाय, केवल 36 राफेल ही पहुंचे। हल्के लड़ाकू विमानों की तैनाती भी समय से पीछे है और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों में दिक्कतें आ रही हैंI

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