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SBI का था दो साल का बड़ा डिफॉल्ट, अब देना होगा भारी जुर्माना, और ये है पूरा मामला

State Bank of India: एसबीआई पर जुर्माना लगाने के बाद कंज्यूमर फोरम की प्रमुख इसाबा बट ने कहा कि बैंक

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Indianews@agencyBy : Indianews@agency

  |  2022-09-09T12:54:27+05:30

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एसबीआई पर जुर्माना लगाने के बाद कंज्यूमर फोरम की प्रमुख इसाबा बट ने कहा कि बैंक को यह रकम मुआवजे और जुर्माने के तौर पर देनी चाहिए. यह निर्णय बैंकों में क्षेत्रीय भाषाओं के प्रयोग से संबंधित है। कन्नड़ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष टीएस नागभरन ने कहा कि यह फैसला एक मिसाल कायम कर सकता है

देश के सबसे बड़े बैंक SBI को दो साल पहले एक गलती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को जुर्माना भरना होगा। केवल यही त्रुटि थी कि बैंकर चेक पर दर्ज किए गए नंबर को सही ढंग से नहीं पढ़ सका और उसे वापस कर दिया। इसके बाद पीड़िता बैंक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम पहुंची और न्याय की मांग की

इस मामले में लगाया गया फाइन

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरी बात हुबली के लिए है। इधर पीयू गवर्नमेंट कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरर वदिराजाचार्य इनामदार ने बिजली बिल का चेक जारी किया। SBI का चेक 6000 रुपये का था और 3 सितंबर 2020 को हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (HESCOM) को जारी किया गया था। लेकिन चूंकि HESCOM खाता केनरा बैंक के पास है, इसलिए यह चेक SBI शाखा में अनुमोदन के लिए भेजा गया है। यहीं से सारा मामला शुरू हुआ।

अंकों के फेर में फंस गया बैंक:

दरअसल, कनारा बैंक की ओर से 6000 रुपये का यह चेक कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के हल्याल स्थित एसबीआई की शाखा में मंजूरी के लिए भेजा गया था. इस चेक की सारी जानकारी कन्नड़ भाषा में लिखी हुई थी और नंबर भी इसी भाषा में थे। हलाल शाखा के बैंक कर्मचारी ने गलती की कि इस चेक पर कन्नड़ नंबर 9 लिखा था। यह चेक पर लिखी तारीख के महीने के खंड में दर्ज किया गया था। ऐसे में बैंक ने सितंबर को जून समझ लिया और परिणामस्वरूप चेक खारिज कर दिया गया।

मिसाल कायम करेगा यह फैसला:

उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष इशप्पा भूटे, सदस्य वी ए बोलिशेटी और पीसी हिरेमथ ने 7 सितंबर 2022 को दिए गए अपने आदेश में कहा कि बैंक को मुआवजे और जुर्माने के रूप में इस राशि का भुगतान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह निर्णय इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह बैंकों में ट्राई-लिंगुअल पॉलिसी (Tri-Lingual Policy)में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को जारी रखता है. कन्नड़ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष टीएस नागभरण ने कहा कि फैसला एक मिसाल कायम कर सकता है.

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