India News Agency
Begin typing your search above and press return to search.

माउंटबेटन(Mountbatten) से शुरू और अब रामनाथ कोविंद पर खत्म… शायद आखिरी थाI इस संसद भवन में कल का विदाई समारोहI

1921 से 1927 के बीच पुराने संसद भवन का निर्माण हुआ था। नया संसद भवन 64,500 वर्ग मीटर में फैला

माउंटबेटन से शुरू और अब रामनाथ कोविंद पर खत्म... शायद आखिरी था इस संसद भवन में कल का विदाई समारोह

Indianews@agencyBy : Indianews@agency

  |  2022-07-24T04:36:37+05:30

माउंटबेटन से शुरू और अब रामनाथ कोविंद पर खत्म… शायद आखिरी था इस संसद भवन में कल का विदाई समारोह

1921 से 1927 के बीच पुराने संसद भवन का निर्माण हुआ था। नया संसद भवन 64,500 वर्ग मीटर में फैला है जो अभी की इमारत से 17,000 वर्ग मीटर ज्‍यादा है। लोकसभा का आकार मौजूदा सदन से लगभग तिगुना होगा। लोकसभा में 888 सदस्यों के लिए सीटें होंगी। वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में 326 सीटें होंगी। संयुक्त सत्र के दौरान 1224 सदस्य साथ में बैठ सकेंगे। ये कहानी इसलिए बताई जा रही है क्योंकि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शायद वो आखिरी राष्ट्रपति हैं जो कि इस संसद भवन से विदाई ले रहे हैं।

जल्द पूरा हो जाएगा सेंट्रल विस्टा का काम
संसद भवन की नई इमारत सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जल्द ही पूरा हो जाएगा। अभी भी कई विभागों को नई जगह शिफ्ट किया जा चुका है। ये पहले से ज्यादा भव्य और खूबसूरत बनाया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ऐसे अंतिम राष्ट्रपति होंगे जिन की विदाई उस संसद से होगी जहां पुराने राष्ट्रपतियों की विदाई हुई। विलियम माउंटबेटन से लेकर रामनाथ कोविंद भारत की वर्तमान संसद ने राष्ट्रअध्यक्षों को विदाई दी थी। अब द्रौपदी मुर्मू जब विदा होंगी तो उस वक्त नई संसद देश में मौजूद होगी और संभवतः उनकी विदाई वहीं से हो।

नई इमारत त्रिकोणीय
नई इमारत तीन मंजिला है। नए संसद भवन का डिजाइन त्रिकोणीय है। नई बिल्डिंग की डिजाइन में लोकसभा, राज्यसभा और एक खुला आंगन है। दोनों ही सदन सुविधाओं व डिजाइनिंग के लिहाज से स्टेट ऑफ आर्ट हैं। नई संसद में दोनों सदनों के साथ-साथ सभी सांसदों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस ऑफिस की व्यवस्था भी होगी। यहां सांसदों के लिए डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। नए सदन में सांसदों की बैठने की व्यवस्था मौजूदा व्यवस्था से हटकर ज्यादा खुली व आरामदेह होगी। एक टेबल पर दो सासंद बैठेंगे। सभी मंत्रियों के एक ही जगह पर बैठने की व्यवस्था की गई है, जिससे उनके आने जाने में लगने वाले वक्त की बचत हो सके।

अब तक सभी राष्ट्रध्यक्षों की गवाह है ये इमारत
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू देश की 15वीं प्रेसिडेंट हैं। रामनाथ कोविंद को मिलाकर देश के 14 राष्ट्रपतियों ने इसी संसद भवन से विदाई ली थी। आज संसद के सेंट्रल हॉल में उनके सम्मान में कार्यक्रम रखा गया था। कोविंद ने अपना विदाई भाषण भी दिया। समारोह में प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। कोविंद को विदाई पत्र, स्मृति चिह्न भेंट किया गया। इस दौरान उन्होंने सभी सदस्यों का धन्यवाद देते वक्त नसीहतें भी दी।

राष्ट्रपति के विदाई भाषण
विदाई अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आज आप सबसे जब मैं विदाई ले रहा हूं तो मेरे हृदय में अनेक पुरानी स्मृतियां उमड़ रही हैं। इसी परिसर में जिसे सेंट्रल हॉल के रूप में जाना जाता है। वर्षों तक न जाने कितने सांसदों के साथ यादगार पल बिताए हैं। पांच साल पहले मैंने इसी स्थान पर शपथ ली है। आप लोगों के लिए मेरे दिल में विशेष स्थान है। यहां मौजूद सभी सांसदों और मंत्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी के लिए यह गर्व की बात है कि आप भारत की जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि मेरे सभी पूर्व राष्ट्रपति मेरे लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। कोविंद ने कहा कि पार्टियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर के सपनों का भारत बन रहा है।

राजनीतिक पार्टियों को नसीहत भी
उन्‍होंने कहा कि आपस में भले ही मतभेद हो लेकिन देश की पार्टियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठना चाहिये। पांच साल पहले, मैंने यहां सेंट्रल हॉल में भारत के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। मेरे दिल में सभी सांसदों के लिए खास जगह है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने विदाई संबोधन के दौरान कहा कि COVID महामारी के कारण दुनिया संघर्ष कर रही है। मुझे उम्मीद है कि हम महामारी से सबक सीखेंगे, हम भूल गए कि हम सब प्रकृति का हिस्सा हैं। कठिन समय में भारत के प्रयासों की दुनिया भर में प्रशंसा हुई।

Next Story