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Demonetization: नोटबंदी के छह साल, लेन-देन का तरीका बदला, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नकदी का खतरा बरकरार

छह साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की थी। विमुद्रीकरण के बाद से देश में बड़े बदलाव हुए हैं। देश में लोग अब कैश की जगह डिजिटल ट्रांजेक्शन को तरजीह दे रहे हैं।

Demonetization: नोटबंदी के छह साल, लेन-देन का तरीका बदला, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नकदी का खतरा बरकरार

IndiaNewsHindiBy : IndiaNewsHindi

  |  8 Nov 2022 10:11 AM GMT

आज नोटबंदी की छठी बरसी है। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद पूरे देश में 500 और 1,000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जो उस समय प्रचलन में पूरी मुद्रा का 86 प्रतिशत था।

इसका उद्देश्य देश में काले धन पर अंकुश लगाना, जाली नोटों को खत्म करना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना था। नोटबंदी के बाद से देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आया है। काले धन और नकली नोटों की संख्या पर कुछ हद तक अंकुश लगा है लेकिन काले धन और नकली नोटों की समस्या बनी हुई है।

अवमूल्यन के बाद 2000, 500 और 200 के नए नोट जारी किए गए।

देश में नोटबंदी के साथ-साथ नई करेंसी लॉन्च करने का भी फैसला लिया गया। इसके साथ, 1,000 रुपये के नोट पूरी तरह से चलन से बाहर हो गए और 2,000 रुपये और 200 रुपये के नए नोट बाजार में पेश किए गए। वहीं, 500 का नोट दोबारा जारी किया गया।

डिजिटल लेनदेन को मिला बढ़ावा

नोटबंदी के बाद से देश में डिजिटल लेनदेन में भारी उछाल आया है। देश के कुल लेनदेन में डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015-16 में 11.26 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 80.40 प्रतिशत हो गई और वित्त वर्ष 2026-27 में 88 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

UPI को मिला बड़ा बढ़ावा

एनपीसीआई की वेबसाइट के मुताबिक, तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ रघुराम जी राजन ने 11 अप्रैल 2016 को 21 बैंकों के साथ यूपीआई पायलट लॉन्च किया था, जिसके बाद बैंकों ने 25 अगस्त 2016 से यूपीआई ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करना शुरू कर दिया है। विमुद्रीकरण के बाद एक बड़ा बढ़ावा। UPI के जरिए वित्तीय लेनदेन इस साल अक्टूबर में रिकॉर्ड 12.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

नकद अभी भी प्रमुख

नोटबंदी के बाद से देश में डिजिटल लेनदेन की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन नकदी अभी भी बाजार का राजा बना हुआ है। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि नोटबंदी से पहले देश में 4 नवंबर 2016 को करीब 17.7 लाख करोड़ रुपए की करेंसी थी, जो 21 अक्टूबर को बढ़कर 30.88 लाख करोड़ रुपए हो गई।

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