चीन ताइवान संघर्ष: चीन ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास क्यों कर रहा है? शी जिनपिंग की मजबूरी को समझें

बीजिंग: अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के दौरे के जवाब में चीन ताइवान के आसपास के छह क्षेत्रों में सैन्य अभ्यास कर रहा है। चीन का दावा है कि ये इलाके उसके हैं, इसलिए किसी भी देश को सैन्य अभ्यास पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। चीन के इस सैन्य अभ्यास को देखते हुए ताइवान ने भी अपनी रक्षात्मक क्षमता को काफी बढ़ा दिया है। चीन ने रविवार तक चले अभ्यास के दौरान विमानों और जहाजों को क्षेत्रों से बचने की चेतावनी दी है। ऐसे में चीन के इस अभ्यास को ताइवान की संभावित घेराबंदी और द्वीप पर आक्रमण से पहले का पूर्वाभ्यास माना गया है। चीन की इस कवायद को ताइवान के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के लिए भी खतरा बताया जा रहा है. यही कारण है कि क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी सीमाओं की निगरानी बढ़ा दी है। अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा भी हाई अलर्ट पर है।

चीन के पास ताइवान से कई गुना ज्यादा ताकतवर सेना है
चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है, जिसमें 20 लाख सैनिक तैनात हैं। इतना ही नहीं चीन की नौसेना के पास अमेरिका से ज्यादा जहाज हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के राजनीतिक वैज्ञानिक खारिस टेम्पलमैन ने कहा कि एक स्थिर संतुलन को फिर से स्थापित करने के लिए कुछ कठिन राजनयिक कदमों की आवश्यकता होगी। मुझे नहीं पता कि यह टकराव आखिर में कैसे खत्म होगा, लेकिन मुझे लगता है कि आने वाले कुछ हफ्ते काफी डरावने होने वाले हैं। इस दिन को ध्यान में रखते हुए ताइवान ने अमेरिका से भारी मात्रा में हथियार खरीदे हैं, जिनमें टैंक, तोप, मिसाइल, वायु रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमान शामिल हैं।

ताइवान से 20 किमी दूर पहुंचा चीनी युद्धपोत
चीन ने कहा है कि उसने ताइवान के आसपास के छह इलाकों में अभ्यास शुरू कर दिया है। इनमें युद्धक विमान, नौसैनिक जहाज, मिसाइल, पनडुब्बी और विमानवाहक पोत शामिल हैं। चीन के कई युद्धपोत ताइवान के तट से 20 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच चुके हैं. चीनी जहाजों की इस तैनाती को ताइवान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र का उल्लंघन माना जा रहा है। हालांकि, चीन का दावा है कि ताइवान उसका अविभाज्य हिस्सा है, इसलिए कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं तोड़ा गया है। चीन पहले भी कह चुका है कि वह नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे का कड़ा जवाब देगा। चीन लगातार कहता रहा है कि वह ताइवान पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग करने से नहीं हिचकेगा। वहीं अमेरिका का कहना है कि वह ताइवान को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

लाइव फायर ड्रिल क्या है
लाइव फायर ड्रिल सैन्य अभ्यास का एक रूप है। इसमें गोला बारूद, रॉकेट और मिसाइल की ताकत को लाइव फायरिंग से परखा जाता है। जब भी अभ्यास के दौरान सेनाएं गोला-बारूद से गोलाबारी करती हैं, तो इसे लाइव फायर ड्रिल का नाम दिया जाता है। ये परीक्षण ऐसे क्षेत्र में किए जाते हैं जहां किसी के हताहत होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। यह अभ्यास रंगरूटों को अपने हथियारों के अभ्यस्त होने का अवसर प्रदान करता है। इससे वे इन बड़े हथियारों को चलाना जानते हैं। दूसरा, इस तरह के अभ्यास में सैनिक दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की चिंता किए बिना गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइल दाग सकते हैं। इससे सैनिक यह भी सीखते हैं कि वास्तव में बड़े हथियारों का उपयोग कैसे और कब करना है और इसके क्या प्रभाव होते हैं।

क्यों लाइव फायर ड्रिल ताइवान के लिए खतरा हैं
चीन की लाइव फायर ड्रिल ताइवान के लिए सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक कवायद मानी जा रही है. बीजिंग ने तत्कालीन राष्ट्रपति ली टेंग-हुई की अमेरिका यात्राओं के जवाब में 1995 और 1996 में ताइवान के उत्तर और दक्षिण में मिसाइलें लॉन्च कीं। चीन नियमित रूप से अपने लड़ाकों को ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में भेजता है और कभी-कभी ये विमान विवादित ताइवान जलडमरूमध्य को भी पार कर जाते हैं। हालांकि, हर बार पहले से ही सतर्क ताइवानी वायु सेना चीनी लड़ाकों को खदेड़ देती है। नैन्सी पेलोसी ने जैसे ही ताइवान छोड़ा, 27 चीनी लड़ाकू विमानों ने घुसपैठ की। ऐसे में कई रक्षा विशेषज्ञों को डर है कि ऐसी कोई भी घटना किसी भी समय क्षेत्रीय संघर्ष को जन्म दे सकती है.

नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा से चीन इतना चिढ़ क्यों है?
चीन शुरू से ही ताइवान पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग करने की धमकी देता रहा है। पेलोसी के ताइवान दौरे से पहले चीन ने अमेरिका को कई स्तरों पर धमकी दी थी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बातचीत में उन्हें आग से नहीं खेलने की चेतावनी दी थी। लेकिन, अमेरिका ने इन सभी धमकियों को नजरअंदाज करते हुए पेलोसी को ताइवान भेज दिया। इसे चीन के अपमान के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं जिनपिंग सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के तौर पर तीसरे कार्यकाल की तलाश में हैं। ऐसे में उनका कमजोर लुक उन्हें चीन के राष्ट्रपति की कुर्सी से हटा सकता है.

ताइवान के खिलाफ चीनी कार्रवाई की मजबूरी को समझें
शी जिनपिंग ने कहा है कि ताइवान का भाग्य अनिश्चित काल तक अस्थिर नहीं रह सकता। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का मानना ​​है कि चीन अगले कुछ सालों में ताइवान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ताइवान चीन के संविधान में अपने राष्ट्रीय क्षेत्र में शामिल है। 2005 में अधिनियमित एक अलगाव विरोधी कानून सैन्य कार्रवाई की धमकी देता है यदि ताइवान के शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की संभावना पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। इसे स्वतंत्रता या विदेशी हस्तक्षेप की संभावना को देखते हुए भी लागू किया जा सकता है। चीन स्पष्ट रूप से कहता है कि उसके देश के साथ विदेश नीति का एकमात्र आधार एक चीन सिद्धांत है। ऐसे में अगर कोई देश ताइवान के साथ संबंध बढ़ाता है तो उसे चीन के खिलाफ देखा जाएगा।

ताइवान क्या कर रहा है
ताइवान ने अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है और नागरिक सुरक्षा अभ्यास किया है। ताइवान की सैन्य ताकत चीन की तुलना में काफी कम है। बावजूद इसके ये देश अमेरिकी हथियारों के दम पर चीन को गहरी चोट पहुंचाने को तैयार है. ताइवान की वायु सेना, नौसेना और 165,000 सदस्यीय सशस्त्र बल उच्च तकनीक वाले हथियारों और पूर्व चेतावनी प्रणालियों से लैस हैं। यही वजह है कि जवाबी कार्रवाई के डर से चीन ताइवान पर हमला करने से हिचकिचाता है। अमेरिका ने ताइवान की सुरक्षा के लिए दक्षिण चीन सागर में कई युद्धपोत और अपने एक विमानवाहक पोत को भी तैनात किया है। ऐसे में संकट की स्थिति में अमेरिका ताइवान की मदद के लिए सीधे आगे आएगा।